कजरी की जन्म स्थली माने जाने वाले विंध्याचल के ट्रस्ट और भ्रष्ट की राजनीति में भी जब देश की राजनीति की तरह बरसने के लिए आग ही बची हो, तो नजर मौसम की ओर कर लेनी चाहिए। भले ही देश के अन्य भागो में काले बादल अशुभ ब्रेकिंग न्यूज हो गए हो, पर विंध्य व उसके समीपवर्ती क्षेत्रों में इस मौसम में बादल शुभ ही है, अगर सुहाने होकर बरसे। सुहाने होंगे तो सावन में कजली गीतो में चार चांद लग जायेंगे । ये अलग बात है कि अब लोग बगीचों में न जाकर ‘‘गुगल सर्च‘‘ कर लेते है। कट, कापी, पेस्ट से फेसबुक पर कमेंट कर खुद को कजरी का काबिल समझने लगते है। जबकि एक वक्त था जब बारिश होती थी तो लोग बगीचों में दौड़ने लगते थे, और अब बरसात होती है तो बरामदे में जाते है कपड़े उतारने के लिए और खिड़की दरवाजे बंद करने के लिए। मैट्रो व आधुनिक शहरों का हाल तो यही है, पर अब विंध्य क्षेत्र भी इससे अछुता नही है। पहाडि़यों में विचरण करने वाले कोयल, डिंगुर की आवाज अब सुनाई नही देती। पहले कजली गीत बनते यर्थाथ से, पर अब वो यर्थाथ ही अब विस्थापित नजर आता है। संयुक्त परिवारो की आधार बेला टूट सी गई है। पोतियांे को दादी के साथ तो भतीजो को ताउ के समय बिताने का समय नही है। कजरी के विस्थापित होने पर कजरी गायिका मालिनी अवस्थी ने ठीक ही कहा है कि ‘‘ग्लोबलाइजेशन से भले ही बहुत फायदा हुआ हो, पर कजरी को नुकसान ही हुआ है। लोकगीत या कजरी जीवन की शैली है, वो बदला तो गीत-संगीत बदलेगा ही‘‘। संयुक्त परिवारो के टूटने से सब विस्थापित हो गया है। लड़कियों पास अब झूला-झूलने का समय नहीं है, इंट्रेस की तैयारी जो करनी है। किसान का लड़का अब किसानी नहीं करता तो वह मेंड़ पर कजरी क्या गायेगा?
चुनाव चर्चा के दौरान.....एक मुस्लिम नेता मित्र मिल गये। चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि आप तो बनिया है तो भापजा को ही वोट देंगे। मैने कहा मैं बनिया तो हूं ही पर इससे ये कैसे कह सकते है कि मैं भाजपा को ही वोट दूंगा और पेशे से पत्रकार हूं तो वोट को तो काफी तोल-मोल के ही दुंगा। वो कोई भी किसी भी पार्टी का हो। इस पर महोदय ने कहा कि तो किसे देंगे। तो मैने कहा कि किसे तो नहीं बता सकता पर किस तरीके के नेता को दुंगा वो बता सकता हूं। और ये भी साफ कर दिया कि मीरजापुर जिले से सपा व बसपा के उम्मीदवार उस कैटेगरी में नहीं आते कि उनको वोट दें। क्योंकि बसपा से उस विधायक की पत्नी चुनाव लड़ रही है। जिसे लोगो ने पहले देखा ही नहीं होगा और विधायक जी आम आदमी से कैसे खास बन गये और उन्हें जिताने वाले जस के तस......तो भला उनकी पत्नी जो सामने तक नहीं आती बस गाड़ी में बैठे-बैठे हाथ जोड़ के काम चला रही है। वो जनता के मुद्दो पर कैसे सामने आयेंगी। शायद सब कुछ बिरादरी से हो जाता है बिरादरी की कृपा है। बात सपा के उम्मीदवार की तो उनके मंत्री वाले रूतबे से तो लगता ही नहीं कि वो इस समय चुनाव में भी आम आदमी बनेंगे वो तो आचार संहिता में भी खास बने फिर रह है। सरकार है भाई......। प्रमुख पार्टियों में बची भाजपा, कांग्रेस व आप तो उन्हीं में से चुन लिया जायेगा। जो ज्यादा जानकार होगा, जनता के मसलो पर अच्छी पकड़ रखता होगा, और जो जितने के बाद भी आज की तरह सक्रिय नजर आये.....बाद की बाद पर इतने गुण इनमे ंपरख कर इन्हीं में से किसी एक को वोट दिया जायेगा। मेरे ये विचार इस समय के पार्टी के उम्मीदवारो के लिए है। क्योंकि वोट उम्मीदवार की काबिलियत को देखकर करता हुं....पार्टी की पावर व लहर को देखकर नहीं।
